जिलाधिकारी ने की स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा, मातृ एवं शिशु मृत्यु में कमी लाने पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने की स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा, मातृ एवं शिशु मृत्यु में कमी लाने पर विशेष जोर
मंगलवार को जिलाधिकारी श्री प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य रूप से अप्रैल 2026 से अगस्त 2026 तक जनपद में हुई मातृ एवं शिशु मृत्यु की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम विजय द्वारा अवगत कराया गया कि समीक्षा अवधि में विकासखंड नौगांव एवं मोरी में एक-एक मातृ मृत्यु* हुई है, जबकि जनपद में 16 शिशु मृत्यु दर्ज हुई हैं। उन्होंने मृत्यु के कारणों एवं विभिन्न कारकों का विस्तारपूर्वक विश्लेषण प्रस्तुत किया तथा भविष्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु की रोकथाम हेतु तैयार कार्ययोजना से उपस्थित अधिकारियों एवं सदस्यों को अवगत कराया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि *अप्रैल से जुलाई 2026 तक जनपद में 1003 संस्थागत प्रसव* हुए हैं। विगत वित्तीय वर्ष में जहां *146 घरेलू प्रसव* हुए थे, वहीं इस वित्तीय वर्ष में अब तक यह संख्या घटकर *46* रह गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को स्थानीय स्तर पर और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौंतरी को प्रसव केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस योजना* की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिला चिकित्सालय में 08 बेड का डायलिसिस केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन 32 रोगियों का डायलिसिस* किया जा रहा है।
उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना की प्रगति के संबंध में बताया गया कि जनपद में अब तक 2,05,032 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा 61,738 लाभार्थियों द्वारा योजना का लाभ लिया जा चुका है। इसके साथ ही 2,27,290 आभा (ABHA) आईडी भी बनाई जा चुकी हैं।
टीबी कार्यक्रम की भी हुई समीक्षा
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जनपद में n437 टीबी रोगी हैं, जिनकी नियमित रूप से निगरानी एवं मॉनिटरिंग की जा रही है।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी श्री प्रशांत आर्य ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने तथा शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री पी.एस. पोखरियाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वी.एस. पंगती, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमानी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

